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छत्तीसगढ़

बीजापुर में आस्था और परंपरा का संगम:

चिकटराज मेले में पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने की पूजा-अर्चना

बीजापुर। जिले में आयोजित प्रसिद्ध चिकटराज मेला एक बार फिर आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आया। इस पावन अवसर पर पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने मेले में शामिल होकर स्थानीय परंपराओं का निर्वहन किया और चिकटराज बाबा सहित अन्य देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मेले का माहौल श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा, जहां दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया। इस दौरान पूर्व मंत्री गागड़ा ने क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए मंगलकामनाएं कीं।
उन्होंने कहा कि चिकटराज मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह बस्तर की प्राचीन आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन हमारी जड़ों को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने मेले के आयोजन और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण में लगे सभी लोगों की सराहना भी की।
इस अवसर पर भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इनमें प्रदेश उपाध्यक्ष जी. वेकट, प्रदेश कार्य समिति सदस्य श्रीनिवास मुदलियार, भाजपा जिलाध्यक्ष घासीराम नाग, जिला महामंत्री संजय लुंकड़, फूलचंद गागड़ा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सुखलाल पुजारी, वरिष्ठ नेत्री श्रीमती बी. पुष्पा राव, मंडल अध्यक्ष अशोक राव, युवा कार्यकर्ता गौतम राव और वार्ड क्रमांक 14 की पार्षद श्रीमती सत्यवती परतगिरी सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल थे।मेले में उपस्थित जनसमूह ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
चिकटराज मेला हर वर्ष क्षेत्रीय आस्था का केंद्र बनकर हजारों लोगों को एक मंच पर जोड़ता है। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त करता है। इस वर्ष भी मेले ने लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी और परंपरा के प्रति उनकी आस्था को और मजबूत किया।

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