2008 के ब्लैकआउट समेत कई वारदातों का जिक्र, अब मुख्यधारा में लौटने की अपील
आत्मसमर्पित नक्सली पापा राव का खुलासा: 1995 में संगठन से जुड़कर कई बड़ी घटनाओं में रहा शामिल

बीजापुर।बीजापुर क्षेत्र में सक्रिय रहे आत्मसमर्पित नक्सली पापा राव ने अपने जीवन और नक्सली संगठन से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। एक बातचीत में उन्होंने बताया कि संगठन में शामिल होने के बाद उन्हें “पापा राव” नाम मिला और इसी नाम से वे इलाके में पहचान बनाने लगे।
पापा राव ने बताया कि वे दिसंबर 1995 में नक्सली संगठन में भर्ती हुए थे। संगठन में जाने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि उस समय सरकार का दबाव था और अंदरूनी इलाकों में ग्रामीणों के साथ मारपीट होती थी, जिससे प्रभावित होकर वे संगठन से जुड़ गए।
उन्होंने स्वीकार किया कि संगठन में रहते हुए वे कई घटनाओं में शामिल रहे। वर्ष 1998 में बासागुड़ा के आगे तररेम के पास हुए बम विस्फोट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस हमले में करीब 16 जवान शहीद हुए थे। उस समय वे एरिया कमेटी (एसी) पद पर थे और उनके साथ एरिया कमांडर बद्रन्ना भी मौजूद था, जो अब आत्मसमर्पण कर चुका है।
इसके अलावा जून 2008 में हुए बड़े ब्लैकआउट का भी उल्लेख किया गया, जो दो सप्ताह से अधिक समय तक चला था। इस घटना में माओवादियों ने बिजली के टावरों को निशाना बनाया था, जिससे करीब 3,000 गांवों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। इसका असर अस्पतालों, पेयजल व्यवस्था और रेल यातायात पर भी पड़ा था। इस पर पापा राव ने कहा कि यह कार्रवाई संगठन के स्तर पर की गई थी, जिसका उद्देश्य सुरक्षा तंत्र को प्रभावित करना था, हालांकि इससे आम लोगों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी और इलाके के लोगों के साथ-साथ संगठन को भी इसका नुकसान झेलना पड़ा।
स्कूल भवनों को तोड़ने और सड़कों का विरोध करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल अक्सर स्कूलों में डेरा डालते थे, इसलिए संगठन के निर्णय अनुसार उन्हें नुकसान पहुंचाया जाता था। वहीं, सड़कों के निर्माण से सुरक्षा बलों की पहुंच आसान हो जाती थी, इसलिए इसका विरोध किया जाता था।




