मद्देड में भक्ति, आस्था और नारी शक्ति का अद्भुत संगम, फूलों से सजी बतकम्मा में विराजीं गौरी माता
तेलंगाना की पारंपरिक संस्कृति में रंगा मद्देड, महिलाओं ने विधि-विधान से की गौरी माता की पूजा-अर्चना; फूलों की मनमोहक सजावट और सामूहिक आराधना से भक्तिमय हुआ माहौल

बीजापुर। भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए पहचाने जाने वाले मद्देड में तेलंगाना की पारंपरिक पद्धति के अनुसार मनाया जाने वाला बतकम्मा (गौरी) पूजा पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है। इस पावन अवसर पर गांव की महिलाओं में विशेष उमंग देखने को मिल रही है। रंग-बिरंगे फूलों से सजी बतकम्मा, गौरी माता के प्रति अटूट विश्वास और महिलाओं की सामूहिक भक्ति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है।
बतकम्मा पर्व के दौरान महिलाएं विभिन्न प्रकार के सुंदर और सुगंधित फूलों को एक के ऊपर एक आकर्षक ढंग से सजाकर बतकम्मा तैयार करती हैं। फूलों की यह मनमोहक सजावट प्रकृति के प्रति सम्मान, मातृशक्ति की आस्था और धार्मिक भावनाओं का प्रतीक मानी जाती है। महिलाएं अपने घरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गौरी माता का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। इसके बाद निर्धारित मंडप में एकत्रित होकर सामूहिक रूप से माता की आराधना करती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पर्व को मनाती हैं।

महिलाओं की भक्ति बनी पर्व का मुख्य आकर्षण
मद्देड में बतकम्मा पूजा का सबसे विशेष पक्ष महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और उनकी अटूट श्रद्धा है। पारंपरिक परिधान, फूलों से सजी बतकम्मा और पूजा-अर्चना में लीन महिलाओं की उपस्थिति पर्व की सुंदरता को और बढ़ा देती है। महिलाएं पूरे मनोयोग से गौरी माता की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना करती हैं। सामूहिक पूजा के दौरान महिलाओं के बीच आपसी मेल-मिलाप, सहयोग और अपनत्व की भावना भी दिखाई देती है।
इस धार्मिक आयोजन में कासोजी भू लक्ष्मी सहित श्रीमती सीएच शारदा, श्रीमती संतोषी जैन, श्रीमती पी. स्वेता, श्रीमती सीएच संध्या, श्रीमती सीएच राजेश्वरी, श्रीमती सीएच कांचन माला, पी. प्रशंसा, श्रीमती गायत्री जैन, श्रीमती धन्यलक्ष्मी, श्रीमती जी. कृष्णवेली, श्रीमती ईश्वरोज संध्या और श्रीमती पी. निर्मला सहित अन्य महिलाएं भी श्रद्धापूर्वक भाग ले रही हैं।
परंपरा के साथ जुड़ी है सांस्कृतिक पहचान
मद्देड में वर्षों से चली आ रही बतकम्मा पूजा की परंपरा तेलंगाना की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय जनजीवन के गहरे संबंध को दर्शाती है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए अपनी सांस्कृतिक पहचान को सहेजने और नई पीढ़ी तक पारंपरिक रीति-रिवाजों को पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
बतकम्मा पर्व महिलाओं को एक साथ जोड़कर सामाजिक एकता, पारस्परिक सम्मान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश देता है। फूलों से सजी बतकम्मा में गौरी माता की आराधना करते हुए महिलाएं अपनी आस्था और परंपराओं को जीवंत बनाए हुए हैं। मद्देड में जारी यह आयोजन दर्शाता है कि आधुनिक समय में भी लोकसंस्कृति, धार्मिक विश्वास और महिलाओं की सहभागिता समाज की पहचान को मजबूती प्रदान कर रही है।




