वार्ड-10 में निर्दलीय दावेदारी से बिगड़ सकता है भाजपा-कांग्रेस का चुनावी गणित!
पत्रकार चेतन कापेवार के नाम की चर्चा से बढ़ी सियासी हलचल, दोनों दलों के संभावित प्रत्याशियों के सामने नई चुनौती; समर्थन की अटकलों पर आधिकारिक मुहर का इंतजार

भोपालपटनम। नगर पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही भोपालपटनम की राजनीति में वार्डों के समीकरण बनने-बिगड़ने लगे हैं। खासकर वार्ड क्रमांक 10, वासवी माता वार्ड में युवा पत्रकार एवं प्रेस क्लब सचिव चेतन कापेवार की संभावित निर्दलीय दावेदारी ने भाजपा और कांग्रेस, दोनों के राजनीतिक गणित को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। यदि चेतन निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो इस वार्ड में मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है।
पिछले नगर पंचायत चुनाव में सभी 15 वार्डों में कांग्रेस की जीत के बाद इस बार भाजपा अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। ऐसे में वार्ड-10 को लेकर बढ़ती चर्चाएं दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। चेतन कापेवार की संभावित उम्मीदवारी को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।
समर्थन की चर्चाएं, लेकिन तस्वीर अभी साफ नहीं
राजनीतिक गलियारों में चेतन कापेवार को संभावित समर्थन मिलने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कांग्रेस के एक बड़े नेता और विधायक से जुड़े संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी अटकलें हैं। चर्चा यह है कि चेतन के चुनाव मैदान में उतरने की स्थिति में कांग्रेस इस वार्ड से प्रत्याशी चयन पर नए सिरे से विचार कर सकती है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से ऐसी किसी रणनीति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा के लिए भी आसान नहीं होगा प्रत्याशी चयन?
वार्ड क्रमांक 10 में संभावित निर्दलीय मुकाबले की चर्चा के बीच भाजपा के पर्यवेक्षक गुज्जा वेंकट की भूमिका और प्रत्याशी चयन को लेकर भी राजनीतिक सरगर्मी बनी हुई है। पार्टी के भीतर टिकट के दावेदारों की सक्रियता के बीच यह देखना अहम होगा कि भाजपा किस चेहरे पर भरोसा जताती है। यदि चेतन चुनाव लड़ते हैं, तो मुकाबले का समीकरण प्रत्याशियों के चयन और स्थानीय समर्थन पर निर्भर कर सकता है।
नामांकन के बाद खुलेगा चुनावी तस्वीर का राज
फिलहाल चेतन कापेवार की दावेदारी, विभिन्न दलों के समर्थन और टिकट वितरण को लेकर सामने आ रही बातें चर्चाओं एवं अटकलों तक सीमित हैं। न तो उनकी निर्दलीय उम्मीदवारी की अंतिम पुष्टि हुई है और न ही किसी राजनीतिक दल ने समर्थन को लेकर आधिकारिक घोषणा की है। अब निगाहें भाजपा-कांग्रेस की प्रत्याशी सूची और नामांकन प्रक्रिया पर टिकी हैं। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि वार्ड-10 में मुकाबला सीधे दलों के बीच होगा या निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी समीकरणों को नई दिशा देंगे।




