ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित एवं संवर्धन करते हुए पर्यटन के नक्शे में शामिल करने की
"शिव_ पार्वती कल्याणम " मेले का प्रमुख आकर्षण

बीजापुर/भोपाल पटनम। प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी भोपाल पटनम में स्थित शिवालय में भव्य मेले का आयोजन किया गया । इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में यज्ञ ( हवन ) का आयोजन भी किया गया ।
भोपाल पटनम के मूल निवासी एवं वरिष्ठ नागरिक राम नारायण ताटी के मुताबिक भोपाल पटनम में स्थित शिव मंदिर को ऐतिहासिक धरोहर कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी । मंदिर का निर्माण कब हुआ किसने करवाया इस बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है ।
किंतु जनश्रुति के अनुसार काकतीय वंश के शासक प्रतापरुद्र देव ने तेरहवीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी के निरंतर आक्रनणो से कमजोर हुई शैन्य शक्ति को सुदृढ़ करते हुए विस्तार करने हेतु बस्तर की ओर कूच किया । प्रताप रुद्र देव ने बस्तर की सीमा पर स्थित भद्रकाली संगम में एक शिवलिंग स्थापित कर भूपालेश्वर नाम दिया । आगे बढ़ने पर नगर रूप में जिस स्थान को देखा उसका नाम करण भोपाल पटनम किया गया ।
ताटी के अनुसार भोपाल पटनम में स्थित शिवालय के गर्भ गृह में शिव लिंग के अलावा माता पार्वती गणेश जी एवं नागदेवता की भव्य प्रतिमा भी स्थापित है।
नाग देवता की प्रतिमा देखकर यह अंदाजा भी लगाया जा सकता है कि इस मंदिर का निर्माण जरूर नागवंशीय शासकों द्वारा कराया गया होगा। क्योंकि उस दौरान बस्तर के बारसूर में छिंदक नाग वंशीय शासकों का राज था ।
और नागवंशीय शासकों का राज चिन्ह भी नाग देवता ही था । किंतु यह महज अंदाजा ही है कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं है ।

शिवालय का जीर्णोद्धार समय समय पर होता रहा है ।
इस तथ्य की पुष्टि इस बात से होती है कि 1982_83 में जब मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार किया जा रहा था तब मंदिर के शिखर में स्थित कलश को भी बदला गया ।
पुराने कलश में 1921 में तंजावुर परिवार द्वारा जीर्णोद्धार किए जाने का संकेत तमिल लिपि में अंकित पाया गया ।
कालांतर में श्रद्धालु भक्त गणों के द्वारा समय समय पर मंदिर को आकर्षक एवं भव्य रूप प्रदान करने हेतु अनेक निर्माण कार्य किए गए । आज मंदिर अपने भव्य स्वरूप में स्थित है ।
ताटी के अनुसार मेले की शुरुआत 1982_83 में नवयुवक मंडल की पहल पर शिव पार्वती कल्याणम के साथ किया गया । मेले की शुरुआत भी की गई तब से निरंतर यहां प्रति वर्ष महाशिव रात्रि पर्व के अवसर पर हवन पूजन ,शिव पार्वती कल्याणम के साथ ही तीसरे दिन भंडारे का आयोजन भी किया जाता है ।
अब यह आयोजन शिव मंदिर समिति की ओर से किया जाता है। समिति का कार्य सराहनीय है । मेले के शुरुआती दौर से जुड़ाव होने के कारण मुझे भी परिवार के साथ हवन में सम्मिलित होकर आहुति डालने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।
ताटी ने शासन प्रशासन का ध्यान मेले में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की ओर आकृष्ट करते हुए कहा कि अब आवश्यकता है इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य योजना बनाकर मेले में बड़ी संख्या में आनेवाले श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेय जल ,शौचालय एवं चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कारगर कदम उठाये जाने की जिससे निश्चित रूप से मेले का आकर्षण बढ़ेगा । स्थानीय लोगों ने मेले को सार्वजनिक रुप प्रदान करते हुए पर्यटन के नक्शे में शामिल करने की मांग शासन प्रशासन से की है ।




