तीन राज्यों की सीमाओं पर आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का जीवंत केंद्र
बीजापुर जिले में आस्था के केंद्र: भोपालपटनम और मद्देड के प्राचीन शिवालयों की अनूठी परंपरा

बीजापुर।बीजापुर जिला प्राचीन आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। जिले के भोपालपटनम और मद्देड क्षेत्र के शिव मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक और लोकविश्वासों के कारण भी काफी प्रसिद्ध माने जाते हैं। ये शिवालय अरष पुराने हैं और सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बने हुए हैं।
जिले के अंतिम छोर पर स्थित भोपालपटनम, जो महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमाओं से लगा हुआ है, वहां का शिव मंदिर ब्रिटिश काल से भी पहले का बताया जाता है। स्थानीय जानकारों के अनुसार यह शिवालय वर्ष 1894 से करीब 50 वर्ष पूर्व से अस्तित्व में है। मारुती कापेवार और गट्टू सुधाकर बताते हैं कि वर्ष 1978 में भोपालपटनम शिव मंदिर का व्यापक जीवनोद्धार कराया गया था, जिसके बाद मंदिर का स्वरूप और भी भव्य हुआ।

इसी शिवालय से जुड़ी एक विशेष और अनूठी परंपरा वर्ष 1982 से शुरू हुई। तेलंगाना पद्धति के अनुसार स्वर्गीय गुज्जा कृष्णा ने शिव कल्याण यानी भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रस्म और महाशिवरात्रि के दिन लगने वाले मेले की शुरुआत कराई। तब से लेकर आज तक यह परंपरा निरंतर निभाई जा रही है और भोपालपटनम की पहचान बन चुकी है।भोपालपटनम में महाशिवरात्रि का पर्व हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 14 फरवरी से शुरू होकर 15 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव, माता पार्वती का विवाह रश्म समेत चार दिनों तक बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। शिवरात्रि से एक दिन पहले मंडापच्चापन, कलश यात्रा और भगवान शिव तथा माता पार्वती की सगाई की रस्म होती है। महाशिवरात्रि के दिन पूरे विधि-विधान से शिव-पार्वती विवाह संपन्न कराया जाता है। इसके बाद अगले दो दिनों तक अन्य धार्मिक रस्में, पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं।इस मंदिर से जुड़ा एक लोकविश्वास भी लोगों में खासा प्रचलित है। मंदिर से जुड़े जानकारों के अनुसार यदि किसी कन्या का विवाह अर्चन या अन्य कारणों से नहीं हो पा रहा हो, तो इस शिवालय से अक्षत (चावल) लेने मात्र से विवाह का योग बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस आस्था के कारण कई जोड़ों के विवाह सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं, जिससे मंदिर की मान्यता और भी गहरी हो गई है।महाशिवरात्रि के अवसर पर भोपालपटनम शिव मंदिर में केवल बीजापुर जिला ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना से भी हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से पूरा क्षेत्र शिवभक्ति में सराबोर नजर आता है।वहीं भोपालपटनम और बीजापुर के बीच स्थित नगर मद्देड में भी एक प्राचीन शिव मंदिर वर्षों से भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां पत्थर से निर्मित शिवलिंग स्थापित है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं। महाशिवरात्रि के दिन यह संख्या हजारों में पहुंच जाती है और भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक कर मनोकामनाएं मांगते हैं।मद्देड स्थित शिव मंदिर परिसर में शिव मंदिर का निर्माण कार्य इन दिनों जोरों पर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण पूरा होने के बाद यह मंदिर भी क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन जाएगा।भोपालपटनम और मद्देड के शिवालय न सिर्फ प्राचीन इतिहास के साक्षी हैं, बल्कि आज भी जीवंत परंपराओं, लोकआस्थाओं और सामूहिक श्रद्धा के माध्यम से लोगों के जीवन से गहराई से जुड़े हुए हैं।




