नेशनल पार्क क्षेत्र के दुर्गम गांवों तक पहुंचे विधायक विक्रम मंडावी, ग्रामीणों से सीधा संवाद कर जानी जमीनी समस्याएं
इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में पहुंचकर विधायक ने सुनीं आदिवासियों की पीड़ा, सड़क-बिजली-पानी-स्वास्थ्य सहित बुनियादी सुविधाओं की उठी मांग

बीजापुर। नक्सल प्रभावित और इंद्रावती नेशनल पार्क जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बसे गांवों तक बड़े जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की पहुंच अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे इलाकों में वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की कमी, विकास कार्यों का अभाव और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी कड़ी में बीजापुर जिले के विधायक विक्रम शाह मंडावी ने एक सराहनीय पहल करते हुए नेशनल पार्क क्षेत्र के दूरस्थ गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं से रूबरू हुए।
विधायक विक्रम मंडावी ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत भोपालपट्टनम एवं भैरमगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र में स्थित विभिन्न ग्राम पंचायतों का भ्रमण किया। इस दौरान वे पीलूर, छोटे काकलेड, बड़े काकलेड, एडापल्ली, सांड्रा तथा सागमेटा ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में पहुंचे। इन गांवों में पहुंचना आसान नहीं है, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद विधायक ने ग्रामीणों के बीच जाकर उनकी बात सुनी, जो अपने आप में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

विधायक के आगमन से इन दूरस्थ इलाकों के ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने वर्षों बाद किसी बड़े जनप्रतिनिधि को अपने बीच पाकर खुशी जाहिर की और खुले मन से अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं। नेशनल पार्क क्षेत्र में बसे होने के कारण यहां रहने वाले लोगों को कई तरह की पाबंदियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने सबसे प्रमुख रूप से पीढ़ियों से यहां निवासरत आदिवासी परिवारों के विस्थापन नहीं किए जाने की मांग रखी।

ग्रामीणों ने विधायक को बताया कि क्षेत्र में पक्की सड़कों का अभाव है, जिससे बरसात के दिनों में गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। बिजली की सुविधा नाममात्र की है और नियमित आपूर्ति नहीं होने से दैनिक जीवन प्रभावित होता है। पेयजल की समस्या भी गंभीर बनी हुई है, कई गांवों में आज भी पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन उनकी आपूर्ति भी नियमित नहीं है। मोबाइल नेटवर्क की कमजोर कनेक्टिविटी के कारण ग्रामीण संचार सुविधा से वंचित हैं, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में परेशानी और बढ़ जाती है।
इसके अलावा ग्रामीणों ने धान खरीदी केंद्र की स्थापना या नजदीकी केंद्रों तक आसान पहुंच की मांग की, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर-दराज भटकना न पड़े। वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पट्टों के वितरण और मान्यता को लेकर भी समस्याएं सामने आईं। तेंदू पत्ता तोड़ाई में बेहतर सुविधाएं और उचित मूल्य देने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक बताई गई। ग्रामीणों ने स्कूल, आश्रमों की व्यवस्था में सुधार और क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।
इन सभी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने विधायक विक्रम मंडावी के समक्ष अपनी पीड़ा विस्तार से रखी। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में दुर्गमता, सुरक्षा चुनौतियां और प्रशासनिक पहुंच की कमी विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना था कि यदि बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो उनका जीवन स्तर काफी हद तक सुधर सकता है।
विधायक विक्रम मंडावी ने ग्रामीणों की बातों को गंभीरता से सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के साथ शासन-प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा, “आपकी हर समस्या मेरी समस्या है। मैं इन मुद्दों को विधानसभा में भी उठाऊंगा और संबंधित विभागों से चर्चा कर इनके समाधान के लिए हर संभव प्रयास करूंगा।” उन्होंने ग्रामीणों से एकजुट रहने और अपने अधिकारों के लिए जागरूक होकर संघर्ष जारी रखने की अपील भी की।
इस दौरे के दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य बसंत ताटी, सोमारू कश्यप, मिच्चा मुतैया, अशोक मडे, सुरेंद्र चापा, मिच्चा समैया, शैलेश मंडावी, पुरुषोत्तम खत्री, अरुण वासम सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के ग्रामीण और कांग्रेसजन मौजूद रहे। सभी ने विधायक के इस पहल की सराहना की।
नेशनल पार्क जैसे संवेदनशील और उपेक्षित क्षेत्र में विधायक का यह दौरा ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। ग्रामीणों को विश्वास है कि विधायक के प्रयासों से आने वाले समय में उनके गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचेंगी और वर्षों से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा, जिससे क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सकेगा।




