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छत्तीसगढ़

भोपालपटनम शिवालय : आस्था, परंपरा और शिव-पार्वती कल्याणम की जीवंत विरासत

ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण-संवर्धन और पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की उठी मांग

बीजापुर/भोपाल पटनम । हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भोपाल पटनम में स्थित शिवालय में भव्य मेले का आयोजन किया गया । इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में यज्ञ ( हवन ) भी आयोजित होता है । परिवार सहित मुझे भी हवन में सम्मिलित होकर आहुति डालने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।भोपाल पटनम में स्थित शिव मंदिर को ऐतिहासिक धरोहर कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी । मंदिर का निर्माण कब हुआ किसने करवाया इस बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं है ।किंतु जनश्रुति के अनुसार काकतीय वंश के शासक प्रतापरुद्र देव तेरहवीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी के निरंतर आक्रनणो से कमजोर हुई शैन्य शक्ति का विस्तार करने एवं मज़बूत बनाने हेतु बस्तर की ओर कूच किए । बस्तर की सीमा पर स्थित भद्रकाली संगम में एक शिवलिंग स्थापित कर भूपालेश्वर नाम दिया गया । आगे बढ़ने पर जो नगर रूप में जिस स्थान को देखा गया उसका नाम करण भोपाल पटनम के रूप में किया गया ।भोपाल पटनम में स्थित शिवालय के गर्भ गृह में शिव लिंग के साथ ही माता पार्वती गणेश जी एवं नागदेवता की भव्य प्रतिमा भी स्थापित है।नाग देवता की प्रतिमा देखकर यह अंदाजा भी लगाया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण जरूर नागवंशीय शासकों द्वारा कराया गया होगा। क्योंकि उस दौरान बस्तर के बारसूर में नाग वंशीय शासकों का राज था ।और नागवंशीय शासकों का राज चिन्ह नाग देवता ही था । किंतु यह महज अंदाजा है कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं है । शिवालय का जीर्णोद्धार समय समय पर किया जाता रहा ।इस बात की पुष्टि इस बात से होती है कि 1982_83 में जब मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार किया जा रहा था तब मंदिर के शिखर में स्थित कलश को भी बदला गया ।


पुराने कलश में 1921 में तंजावुर परिवार द्वारा जीर्णोद्धार किए जाने का संकेत तमिल लिपि में अंकित पाया गया ।कालांतर में श्रद्धालु भक्त गणों के द्वारा समय समय पर मंदिर को आकर्षक एवं भव्य रूप प्रदान करने अनेक निर्माण कार्य किए गए । आज मंदिर अपने भव्य स्वरूप में स्थित है । मेले की शुरुआत 1982_83 में नवयुवक मंडल की पहल पर शिव कल्याणम महोत्सव के साथ किया गया । मेले की शुरुआत भी की गई तब से निरंतर यहां प्रति वर्ष हवन पूजन ,शिव कल्याणम के साथ ही तीसरे दिन भंडारे का आयोजन भी किया जाता है ।अब यह आयोजन शिव मंदिर समिति की ओर से किया जाता है। समिति का कार्य सराहनीय है ।

अब आवश्यकता है इसके संरक्षण एवं संवर्धन की तथा इसे सार्वजनिक रुप प्रदान करते हुए पर्यटन के नक्शे में शामिल करने की.आशा है शासन दीर्घ कालिक योजना के तहत विकसित करते हुए पर्यटन के मान चित्र में जरूर शामिल करेगी ।

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