बस्तर पंडुम का भव्य शुभारंभ, राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तर को मिली नई पहचान : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
जगदलपुर में बोले सीएम— डर की जगह भरोसे ने ली, जहां गोलियां चलती थीं वहां आज स्कूलों की घंटी बज रही

जगदलपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम के शुभारंभ अवसर पर सभी को “जय जुहार” कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक आयोजन में देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका सहित सभी अतिथियों की उपस्थिति बस्तर, उसकी महिलाओं और जनजातीय समाज के सम्मान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर और उसकी सांस्कृतिक आत्मा को नमन करने का अवसर है।

सीएम साय ने कहा कि बस्तर पंडुम सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन दर्शन का प्रतिबिंब है, जो कलाकारों को मंच और पहचान देता है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध परंपराओं और संस्कारों की भूमि है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 1954 ग्राम सभाओं ने इसमें भाग लिया था, जो समाज और कलाकारों की बड़ी उपलब्धि है। इस वर्ष 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया है। जहां पहले 6 विधाएं थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बस्तर में माओवादियों का खौफ था, आज डर की जगह भरोसे ने ले ली है। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है। जहां पहले गोलियां चलती थीं, वहां आज स्कूलों की घंटी बज रही है। नई पुनर्वास नीति से भी सकारात्मक परिणाम मिले हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पानी, बिजली और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान वनोपज है। तेंदूपत्ता के दाम बढ़ाए गए हैं और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बस्तर को भारतीय संस्कृति का गहना बताया है। आज बस्तर का युवा हथियार नहीं, बल्कि खेल और कला को अपना हथियार बना रहा है। राष्ट्रपति के आगमन से बस्तर को नई उड़ान मिलेगी। अंत में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति महोदया के प्रति आभार व्यक्त किया।




